त्रिमुखी रुद्राक्ष मांगलिक दोष दूर करता है

त्रिमुखी रुद्राक्ष मांगलिक दोष दूर करता हैजन्मकुंडली(Horoscope) में यदि मंगल ग्रह(Mars planet) प्रतिकूल स्थिति में है तथा विवाहादि प्रसंग में मांगलिक  दोष उत्पन्न कर रहा है तो त्रिमुखी रुद्राक्ष (trimukhi rudraksh) मांगलिक दोष दूर करता है। मंगल ग्रह गर्भपात अथवा भ्रूण हत्या का भी कारक ग्रह है। अतएव मंगल ग्रह की प्रतिकूलता से उत्पन्न सभी रोगो और दोषो के निदान और निवारण के लिए त्रिमुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। वस्तुतः यह प्रयत्नों में सफलता, कार्य क्षेत्रों में सिद्धि, अनुकूल साधनों की प्राप्ति तथा विद्यार्जन में बहुत जल्द लाभ प्रदान करता है।

 

त्रिमुखी रुद्राक्ष भ्रूण हत्या जैसे दोषों का तुरंत ही निवारण करने में समर्थ है। भ्रूण हत्या करनेवाले को यह रुद्राक्ष अवश्य ही धारण करना चाहिए। इसमें तीन देवों ब्रह्मा, विष्णु और महेश त्रिगुणों सत्व, रजस तथा तमस,त्रिलोक आकाश पाताल तथा मर्त्य की दिव्य शक्तियां अंतर्निहित रहती है वास्तव में यह साक्षात् जन्म स्थिति और लय का कारण है।

त्रिमुखी रुद्राक्ष और ज्योतिष

त्रिमुखी रुद्राक्ष साक्षात् अग्नि का रूप है। इसका अधिपति ग्रह मंगल है। मंगल ग्रह की प्रतिकूलता के निवारण के लिए इस रुद्राक्ष को अवश्य धारण करना चाहिए। यह मूंगे (coral) से भी अधिक प्रभावशाली है। मंगल को  ग्रीवा,गुर्दा,लाल रक्त कण,जननेन्द्रियों इत्यादि का कारक (Significator)ग्रह माना गया है। इसीलिए तीन मुखी रुद्राक्ष को ब्लडप्रेशर, (B.P)चेचक, बवासीर, रक्ताल्पता, हैजा, मासिक धर्म संबंधित रोगों के निवारण हेतु धारण करना चाहिए। इसके धारण करने से श्री, तेज एवं आत्मबल बढ़ता है। यह स्वस्थ तथा उच्चत्तर शिक्षा के लिए अत्यंत ही शुभ फल प्रदान करने वाला रुद्राक्ष है। इसे धारण करने से  प्रतिस्पर्धा में सफलता मिलती है तथा पढ़ाई व व्यापार संबंधित कार्यो में प्रगति होती है। यह यथा शीघ्र दरिद्रता दूर करता है।

अग्नि स्वरूप होने के कारण इसे धारण करने से अग्नि देवता प्रसन्न होते हैं, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है तथा तन और मन स्वस्थ रहता है। तीव्र ज्वर में यह अत्यंत लाभकारी होता है कहा जाता है कि इसके पहनने मात्र से ही लाभ मिलने लगता है।

मेष, सिंह, धनु राशि वाले तथा मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु तथा मीन लग्न के जातकों को इसे अवश्य धारण करना चाहिए। इसे धारण करने से सर्वपाप नाश होते हैं।

त्रिमुखी रुद्राक्ष धारण विधि तथा मन्त्र

त्रिमुखी रुद्राक्ष धारण करने के लिए नित्य क्रिया से निवृत्त होकर शुद्ध जल से स्नान करना चाहिए तदुपरांत गृह में स्थित मंदिर में विधिपूर्वक विनियोग, ऋष्यादिन्यास,करादिन्यास, हृदयादिन्यास  तथा ध्यान करना चाहिए उसके बाद त्रिमुखी रुद्राक्ष के लिए निर्धारित मन्त्र का जप करना चाहिए।

प्रायः सभी पुराणों में मन्त्र भिन्न-भिन्न दिया गया है यथा —

पद्म पुराणानुसार :- ॐ वुं त्रिवक्त्रस्य

शिवमहापुराण :- ॐ क्लीं नमः।

मन्त्रमहार्णव :- ॐ ॐ नमः।

परम्परानुसार :-  ऊँ रं हैं ह्रीं औं।

इस मंत्र का जाप कम से कम 108 बार (एक माला) करना चाहिए तथा इसको सोमवार के दिन धारण करना चाहिए।

 
Tagged with 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *