पहले भाव का स्वामी तीसरे भाव में | First lord in third house

 पहले भाव का स्वामी तीसरे भाव में | First lord in third houseपहले भाव का स्वामी तीसरे भाव में | First lord in third house तीसरा भाव सहज परिश्रम का भाव  है यदि इस भाव में लग्न का  स्वामी  बैठा है तो ऐसा जातक अपने प्रयास से अपना भविष्य निर्माण करता है। यदि ऐसा व्यक्ति अपने भाग्य को कोसता है तो वह जीवन में कभी भी आगे नहीं बढ़ सकता है क्योकि यदि आप ऐसा करते है तो इसका मतलब है की आप लोगो के सामने अपनी कमजोरी छुपा रहे है अतः अपने ऊपर विशवास रखे और अपने लिए पहाड़ के पत्थर को काट कर मार्ग का निर्माण करने का संकल्प ले ले यही मूल मन्त्र है शेष विचार तो आप को करना है हां यह न सोचे की मैं निरर्थक बोल रहा हु यह कटु सत्य है यह आप भी नहीं आप ही जानते है। आप परिश्रमी है परिश्रम ही आपके सफलता का राज है और परिश्रम के बल पर ही आपकी गिनती प्रभावशाली व्यक्ति के रूप में होती है।

 

तृतीय स्थान छोटे भाई का होता है  | House of Younger Brother

तृतीय भाव भ्रातृ भाव भी है यदि लग्न का स्वामी इस भाव में है तो भाई से सम्बन्ध ख़राब बताया गया है परन्तु हर स्थिति में यह नियम लागू नहीं होता है।  यदि लग्नेश यहाँ शुभ स्थिति में है तो भाइयो से अच्छा सम्बन्ध होता है। आपकी सफलता में भाई का योगदान भी होगा अतः आपको चाहिए की इस अवसर का लाभ उठाये।  यदि अशुभ स्थिति में लग्न का स्वामी बैठा  है तो लड़ाई झगड़ा निश्चित ही संभावित है। यदि लग्नेश अशुभ स्थिति में है तो आप ही सबसे कनिष्ठ होंगे।

यवन जातक पुस्तक में कहा गया है —

लग्नेशे सहजे षष्ठे सिंहतुल्यपराक्रमी
सर्व सम्पद्युतो मानी द्विभार्यो मतिमान सुखी।

अर्थात यदि लग्न का स्वामी सहज वा तृतीय भाव में स्थित है तो  वैसा व्यक्ति सिंह के समान पराक्रमी होता है और वह धन-धान्य से युक्त होता है। ऐसे जातक को दो पत्नी का सुख भी प्राप्त होता है ऐसा शास्त्रीय कथन है।

पहले भाव का स्वामी तीसरे भाव में | First lord in third house

तृतीय स्थान लघु यात्रा का भाव है | House of short journey 

तृतीय स्थान लघु यात्रा का भी होता है तथा यह भाव चतुर्थ भाव से बारहवाँ भाव भी है अतः लग्नेश के यहाँ होने से जातक अपना  कर्म स्थल घर से दूर बनाता है और उसे घर से बाहर सफल होते देखा गया है। इस जातक अपना घर विदेश ( Foreign country ) में भी बनाता है। आप विदेश जाने के लिए इच्छुक रहते है और आपको इसमें सफलता भी मिलेगी। तृतीयस्थ लग्नेश वाला जातक अपने बौद्धिक क्षमता का इस्तेमाल कर आगे बढ़ता है।

यदि तृतीय भावस्थ स्वामी के दशा अंतरदशा चल रही है तो उस समय आपका ट्रांसफर भी हो सकता है और यदि शुभ ग्रह वह बैठा है तो ट्रांसफर से आपको लाभ मिल सकता है।

 
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