सिंहस्थ गुरु का प्रवेश एवं फल (Result of Jupiter Transit in Leo)

सिंहस्थ गुरु का प्रवेश एवं फल(Result of Jupiter Transit in Leo) प्रस्तुत लेख में दिया गया है। गुरु का सिंह राशि में प्रवेश मंगलवार दिनांक 14 July 2015 को सुबह 7:45 में हुआ है। गुरु इस राशि में 11 August 2016 तक रहेंगे। 12 वर्ष के बाद गुरु का सूर्य (Sun)की राशि सिंह में प्रवेश हुआ है। इस राशि में रहते हुए गुरु सर्वप्रथम केतु के मघा नक्षत्र में भ्रमण करेंगे तत्पश्चात शुक्र तथा सूर्य के नक्षत्र में परिभ्रमण करेंगे। नवांश (Navamsha) में मेष(Aries) राशि से लेकर धनु(Sagittarius) राशि तक क्रमशः परिभ्रमण करेंगे।

 

सिंहस्थ गुरु का फल (Result of Jupiter Transit in Leo)

यदा सिंहगुरूश्चैव सुभिक्षं तत्र जायते। मेघाश्च प्रबालस्तत्र बहुसस्याचमेदिनी।।

सुभिक्षं सर्पदंशश्च मेघोप्याषाढ़ भाद्रयोः। श्रावणे वृष्टिरल्पैवसुकालः कार्तिकेमतः।।

अर्थात गुरु जब सिंह राशि (when Jupiter in Leo sign)  में आते है तो उस वर्ष सुभिक्ष अर्थात गेहू,धान्य, चना आदि अनाज का उत्पादन अधिक होगा तथा वर्षा अनुकूल होगी। विभिन्न प्रकार की फसले मिश्रित करके कई नए फल, फूल तृणं आदि की पैदावार होगी। गाय, भैस आदि अधिक दूध देंगे। जानवरो(Animals) के दाम में भी तेजी होगी। देवताओ विद्वानो महापुरुषों एवं ब्राह्मणो का आदर सम्मान बढ़ जाएगा। आषाढ़ और भाद्रपद में अच्छी वर्षा होगी। श्रावण में कम वर्षा तथा कार्तिक में सुकाल अर्थात शुभ वातावरण एवं समय होगा।

jupiter-min

शास्त्रानुसार जब ग्रुरु सिंहस्थ हो तो उसे श्रावण संवत्सर कहा जाता है। यह संवत्सर वर्षा के दृष्टिकोण से अच्छा है। गुरु की सिंह राशि में होने पर मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए ऐसी मान्यता है। शुभ ग्रह होने के कारण गुरु का सिंहस्थ होना धार्मिक दृष्टि (Religious Aspects) से अनुकूल है। सिंह राशि में आने से शुभ कार्य होने के संकेत मिलते है। शिक्षा और धार्मिक क्षेत्रो में उन्नति की सम्भावना है। धर्म की आस्था बढ़ेगी तथा राजनीति(Politics) में सच्चे व निष्ठावान व्यक्ति मंत्री जैसे प्रतिष्ठित पद को प्राप्त करेंगे। खाने वाले पदार्थो में तेजी आएगी तथा महंगाई बढ़ेगी। इसके साथ ही साथ सभी सोने(Gold), चांदी(Silver), पीतल, तांबा इत्यादि में मंदी बना रहेगा।

गोचर में गुरू का प्रभाव शुभ तथा अशुभ दोनों रूप में देश के सभी प्रांतो पर पड़ेगा। देश की राजनीतिक स्थिति में किंचित सुधार होने की सम्भावना है। दो समुदायों के बीच में तनाव बढ़ सकता है। अंतर्राष्ट्रीय संबंधो (International Relations) में विस्तार होगा तथा भारत देश का कद भी बढ़ेगा।

 
Tagged with 
 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *