Fifth House Lord in Ninth House in Hindi

Effects of Fifth House Lord in Ninth House in Hindi | पंचम भाव के स्वामी का नवम भाव में फल किसी भी जन्मकुंडली में पंचम भाव संतान ( children) प्यार , बुद्धि, शिक्षा, लक्ष्मी, धन पिता का भाग्य, माता का धन , शेयर इत्यादि का कारक भाव है यह स्थान तथा इस स्थान का स्वामी जिस भी भाव में स्थित होगा उससे सम्बंधित फल प्रदान करेगा।

 

वस्तुतः पंचम भाव शुभ भाव है और नवम भाव भी शुभ भाव है अतः शुभ भाव के स्वामी का शुभ भाव जाने से निश्चित ही शुभत्व की वृद्धि होगी। ऐसा व्यक्ति सुखी तथा भाग्यवान होता है। पिता के धन से सुख की प्राप्ति होती है। घर में संतान के जन्म के बाद जातक का भाग्योदय होता है ।
आप अपने दोस्तों के बीच बहुत ही लोकप्रिय होंगे। ऐसा व्यक्ति अनेक धार्मिक यात्रा करता है । ऐसे व्यक्ति को जब भी मौका मिलता है धार्मिक यात्रा करने से चुकता नहीं है। आप विदेश यात्रा भी करेंगे। यदि लग्नेश, नवम तथा बारहवे भाव के स्वामी के साथ सम्बन्ध बनता है तो निश्चित ही विदेश यात्रा ( Foreign Travel ) करेंगे।

आप धार्मिक प्रवृति के होंगे। ऐसे लोग किसी मंदिर, मस्जिद या गिरजाघर में मुख्य पुजारी के रूप में भी कार्य कर सकते है। आप जैसे व्यक्ति धार्मिक संस्था से जुड़कर समाज के उत्थान के लिए कुछ करते है। आप अपने शरीर तथा विचारो को व्रत के माध्यम से सात्विक बनाने का प्रयास करते है।

ऐसे जातक की पत्नी व्यवसायी या उद्योगपति हो सकती है । यदि पारिवारिक कारण से इन्हें कार्य नहीं करने दिया जाता है तो भी घर में ही वैसा कार्य करेगी जिससे परिवार की उन्नति होती है। वह परिवार तथा समाज के लिये कार्य करना पसंद करती है। इनका व्यवसाय अवश्य ही बढ़ता है।

यदि हम ज्योतिष के सूत्र “भावात भावम” पर विचार करे तो पंचम भाव से नवम भाव पंचम स्थान होता है और नवम स्थान से पंचम भाव नवम होता है अर्थात लक्ष्मी पति का लक्ष्मी स्थान में बैठने से व्यक्ति अपार सम्पत्ति का मालिक होगा और यह सब घर में सन्तान जन्म के बाद सम्भव है ऐसा भी जानना चाहिए परन्तु अशुभ ग्रह के प्रभाव से फल में कमी भी हो सकती है।

आपका सन्तान आपका और अपना नाम रोशन करेगा तथा दीर्घायु होगा।यही नहीं नवम से पंचम स्थान नवम होने से जातक का पिता सुप्रतिष्ठित तथा सुखी जीवन व्यतीत करने वाला होगा। जातक स्वयं भी अपने पिता तथा गुरु को सच्चे हृदय से मान सम्मान देने वाला होता है।

ऐसे जातक को पैतृक सम्पत्ति ( Paternal Property)  का भी लाभ मिलता है । यदि आप किसी धार्मिक संस्था से जुड़कर कोई काम करते है आपके जीवन में अपार सुख की वृद्धि होगी तथा आपकी इच्छा की पूर्ति भी होगी।

 
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