जन्मकुंडली में लेखक, कवि तथा पत्रकार योग | Journalist & Author Yoga

जन्मकुंडली में लेखक, कवि तथा पत्रकार योग | Journalist & Author Yoga . एक महान लेखक बनने के लिए लेखक मे सामाजिक संवेदना अवश्य होना चाहिए जब व्यक्ति में अंतरनिहित संवेदना तथा सामाजिक संवेदनाये एक साथ दिल को छूती है तब लेखक श्वेत पन्नों पर जो कलमबद्ध करता है वह समाज के लिए स्वच्छ बिना धूल का आईना होता है लेखक का लेखन इसी के सहारे आगे बढ़ता है तो समाज के लिए मिल का पत्थर साबित होता है।
दिनकर जी ने लिखा था –
समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याध जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनका भी अपराध

इनकी लिखी हुई वाणी आज भी चरितार्थ है और कल भी रहेगी। संवेदना के साथ साथ आप में एकाग्रता, स्मरण शक्ति तथा सकारात्मक कल्पना शक्ति का अवश्य ही संचार होनी चाहिए और इसके लिए बुध शुक्र तथा गुरु ग्रह का कुंडली में सामंजस्य होना बहुत जरूरी है। इनके सामंजस्य से ही आपके अंदर की संवेदना लेखन के रूप में दृष्टिगोचर होगी।

हालाँकि कुछ लोग लेखन व पत्रकारिता में प्रसिद्धि की पराकाष्ठा पर होते है तो कुछ लोगअच्छे लेखन के बावजूद भी इससे कोशों दूर होते है। अब प्रश्न यह है कि ऐसा क्यों होता है तो मैं बता दूं कि यह सब भाग्य का खेल है यदि आप की जन्मकुंडली में सरस्वती योग, गजकेसरी योग, राजयोग, महालक्ष्मी योग, चन्द्र मंगल योग इत्यादि हो तो अवश्य ही आपका लेखन अद्भुत औऱ अविस्मरणीय बन सकता है।

लेखन एवं पत्रकारिता के लिए उत्तरदायी ग्रह

बुध | Mercury

बुध बुद्धि, लेखन शक्ति, तर्क शक्ति, भावना का सम्प्रेषण, संवेदनात्मक अभिव्यक्ति इत्यादि का कारक है अत: यदि आपकी कुंडली में बुध ग्रह बलवान है तो आप एक श्रेष्ठ लेखक हो सकते है। Stock Market | Share Trading Combination in Astrology

चन्द्रमा | Moon

चंद्रमा मन, भावनात्मक सम्प्रेषण, संवेदना ,कल्पना की ऊंची उड़ान संकल्प विकल्प की शक्ति इत्यादि का कारक है अतः कुंडली में चन्द्रमा की स्थिति अच्छी होनी चाहिए क्योकि यह ग्रह कल्पना की अन्तःचेतना का द्वार खोलता है।

गुरु | Jupiter

यह ग्रह ज्ञान, लेखन कौशल, मानसिक क्षमता एवं स्वस्थ मेधा शक्ति का कारक ग्रह है। Medical Profession | Doctor Combination in Astrology

शुक्र | Venus

यह ग्रह हमें सौंदर्य बोध कराता है जिसके कारण लेखक का लेखन पाठक के दिल को छूकर महशुस करने लगता है।Musical Talent in Astrology

शनि | Saturn

यह ग्रह जातक को मन-मस्तिष्क को न्यायोचित संवाद करने के मजबूर करता है शनि एकांत और शांत चित प्रदान करने में अहम् भूमिका का निर्वहन करता है ऐसे जातक के लेखन में करुणामय शब्दों का समावेश अधिक होता है।

प्रस्तुत ज्योतिषीय लेख के माध्यम से हम यह जानने का प्रयास करते हैं कि एक सफल लेखक बनने के लिए किसी भी जातक की जन्मकुंडली में कैसा ग्रहीय युति प्रतियुति योग होनी चाहिए। Planetary Combination for Lawyer and Judicial Officers in Birth Chart

जन्मकुंडली में लेखक, कवि तथा पत्रकार योग 

  1. जब लग्नेश, तृतीयेश या तृतीय भाव की युति या दृष्टि संबंध बुध, गुरु, चंद्र या दशम भाव से बने तो जातक लेखन-कार्य को व्यवसाय के रूप में अपनाता है।
  2. जन्मकुंडली में तृतीय भाव तथा बुध का सम्बंध लेखन कार्य से जुड़ा हुआ है अतः यदि कुंडली में तृतीय भाव तथा भावस्थ ग्रह बुध बलवान है यथा उच्च का, अपने घर का होकर इसी स्थान पर स्थित है तो व्यक्ति लेखन कार्य से जुड़ कर मान सम्मान और यश कमाता है।
  3. बुध ग्रह यदि शुभ होकर 1, 3, 4, 5, 7, 8, 9 और 10 भावों में स्थित है तो जातक सफल पत्रकार अथवा लेखक बन सकता है क्योकि उक्त भाव किसी न किसी रूप रूप से विद्या, शिक्षा, ज्ञान, सफलता, व्यवसाय, भाग्य तथा कर्म से जुड़ा हुआ है।
  4. यदि बुध का संबंध वाणी भाव तथा लाभ भाव से होता है तो व्यक्ति लेखक तो बनता ही है साथ ही धन लाभ भी प्राप्त करता है।
  5. यदि जन्मकुंडली में त्रिकोण भाव का स्वामी ग्रह परस्पर युति प्रतियुति वा दृष्टि सम्बन्ध बना रहा है तो वैसा जातक प्रसिद्ध लेखक बन सकता है ऐसा जातक में दूरदर्शी होता है तथा इनके विचार mil का पत्थर साबित होता है।
  6. वृषभ, मिथुन, कर्क, कन्या, तुला, मकर और मीन लग्न के जातक की जन्मकुंडली में यदि उपर्युक्त योग स्थापित है तो निश्चित ही जातक लेखक या पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना नाम रौशन करेगा।
  7. जन्मकुंडली में पंचमेश तथा नवमेश का सम्बन्ध होने पर जातक पत्रकारिता के क्षेत्र में आगे बढ़ता है।
  8. जन्मकुंडली में यदि सरस्वती योग योग बन रहा है तो आप उच्चकोटि के लेखक हो सकते है।
  9. जिस व्यक्ति की कुंडली में बुधादित्य, हंस, भद्र, गजकेसरी योग या महापुरुष योग बना हुआ है वैसे लोगों को लेखन कार्य करना चाहिए इस व्यक्ति लेखक बनकर प्रसिद्धि प्राप्त करता है।
  10. यदि आपकी कुंडली में सरस्वती योग, गजकेसरी योग, राजयोग, हंस योग, महापुरुष योग,भद्र योग तथा चंद्र मंगल योग बन रहा है तो आप लेखन या पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगे इस कारण आपका मान सम्मान और यश बढ़ेगा। 
  11. दूसरा स्थान वाणी स्थान होता है यदि कोई भी योग इस स्थान में बन रहा है तो व्यक्ति अपनी बोली का कमाई खाता है अर्थात ऐसा व्यक्ति एक सफल लेखक व पत्रकार बन सकता है।

प्रसिद्ध लेखक, राष्ट्र कवि रामधारी सिंह दिनकर की कुंडली में उपर्युक्त योग देख सकते है।  रामधारी सिंह दिनकर के ज्योतिषीय ग्रह योग विश्लेषण 

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