गुरु गोचर का प्रथम भाव में फल | Jupiter transit effects in first house

गुरु गोचरगुरु गोचर का प्रथम भाव में फल | Jupiter transit effects in first house गुरु /बृहस्पति का विभिन्न भाव में गोचर का प्रभाव अलग-अलग रूप में पड़ता है। ज्योतिष शास्त्र में गुरु / बृहस्पति को सबसे शुभ ग्रह माना गया है। गुरु की दृष्टि को अमृत तुल्य कहा गया है। देवगुरू बृहस्पति ज्ञान, संतान एवं धन के भी कारक हैं। आइये जानते है कि बृहस्पति/ गुरु का जन्म लग्न से गोचर का जीवन के विभिन्न क्षेत्रों यथा ज्ञान, संतान, धन, भाई-बंधू, माता-पिता, परिवार, शिक्षा, व्यवसाय, वैवाहिक जीवन इत्यादि पर कितना प्रभाव पड़ेगा।

 

 

गुरु गोचर का प्रथम भाव  में फल | Effects of Jupiter’s transit in first house

यदि आपकी कुण्डली में इस समय गुरु प्रथम भाव में गोचर कर रहा है और आप शादी के इच्छुक है तो यह आपके लिए बहुत ही अनुकूल समय है। समझ लीजिए कि आपकी शादी शीघ्र ही होने वाली है। यही नहीं यदि अप्राकृतिक उयाय का सहारा नहीं लेते हैं तो शादी के तुरंत बाद ही आपको संतान का भी तोहफा मिल जाएगा इसमें कोई संदेह नही है। बृहस्पति के गोचर में प्रथम भाव में होने पर परिवार में किसी के साथ मतभेद या विवाद होने की भी संभावना रहती है खासकर गुरु यदि गोचर में मकर राशि का हो।
इस भाव में गुरु के गोचर से आप शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ्य रहेंगे। गुरु आपको अपने कार्य में सफलता और कामयाबी दिलाएगा। आर्थिक रूप से वृहस्पति का गोचर काफी फायदेमंद रहेगा। इस समय आय के नये- नये स्रोत अपने आप बनने लगेंगे। आप अपने सभी कार्यो का सम्बन्ध भविष्य से जोड़ कर करने का प्रयास करेंगे। कोई न कोई नया काम प्रारम्भ होगा तथा वह कार्य भविष्य के लिए फायदेमंद होगा।

इस समय समाज में आपको मान सम्मान, प्रतिष्ठा और कार्य क्षेत्र में उत्तरदायित्व एवं पदोन्नति मिलेगी। यदि वृहस्पति गोचर में है तो आप धर्मिक तथा सामाजिक कामों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेंगे। इस समय कार्य की अधिकता होगी। आपमें अपने कार्यो के प्रति सकारात्मक विचार का प्रादुर्भाव होगा। आप अपने सभी कार्य पूर्ण विशवास और निष्ठां के साथ करेंगे। आप के अंदर कुछ कर गुजारने की इच्छा बढ़ जायेगी। धन का आगमन लगातार बना रहेगा इस कारण आपके अंदर आलस्य भाग जाएगा।

 
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