Learn Vedic Astrology in Hindi | वैदिक ज्योतिष सीखें भाग 1

Learn Vedic Astrology in Hindi | वैदिक ज्योतिष सीखें भाग 1 . भारतीय ऋषिमुनियों ने अपने दिव्य दृष्टि से जिन जिन विषयो का आत्मसाक्षात्कार किया है उनमे ज्योतिष का विशेष स्थान है। वेद की महत्ता को सभी भारतीय जानते है। वेद के षड अंग है। इनमे ज्योतिष का विशेष स्थान है। कहा जाता है की वेद को भलीभांति जानने के षड ग्रंथो यथा शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छन्द और ज्योतिष का अध्ययन करना अत्यंत ही अनिवार्य है बिना इनके अध्ययन के वैदिक ज्ञान अधूरा होता है। अतः आप समझ सकते है की ज्योतिष ( Astrology) का कितना महत्त्व है।

 

षड वेदांग | 6 Vedang 

  1. शिक्षा – यह ध्वनियों का उच्चारण सिखाता है।
  2. व्याकरण – संधि, समास, उपमा, विभक्ति, वाक्य निर्माण आदि का ज्ञान कराता है।
  3. कल्प – यज्ञ निर्माण के लिए विधिसूत्र ।
  4. निरुक्त – शब्दों के मूल अर्थ का ज्ञान कराता है।
  5. छन्द – गायन या मंत्रोच्चारण के लिए आघात और लय का निर्देश स्थापित है।
  6. ज्योतिष – यह आकाशीय पिंडों (सूर्य, पृथ्वी, नक्षत्रों) की गति और स्थिति का ज्ञान कराता है । वेदांग ज्योतिष नामक ग्रन्थ प्रत्येक वेद के लिए अलग अलग था। वेदांग ज्योतिष की रचना लगध मुनि के द्वारा की गई थी। चारो वेदो के वेदांग ज्योतिष मे दो ग्रन्थ ही पाया जाता है -एक आर्च पाठ और दुसरा याजुस् पाठ। इस ग्रन्थ मे दो भाष्य मिलता है एक सोमाकर नामक विद्वान के प्राचीन भाष्य तथा दुसरा कौण्डिन्न्यायन संस्कृत व्याख्या के नाम से मिलता है।

ज्योतिष विज्ञान वास्तव में ज्योति वा प्रकाश है जो व्यक्ति, परिवार तथा समाज को ऐसी ऊर्जा प्रदान करता है जो सर्वमंगलकारी होता है। हा ज्योतिषी का अधूरा ज्ञान “नीम हकीम खतरे जान” कहावत को चरितार्थ करने कोई कसर नही छोड़ेगा। ज्योतिषी का अधूरा ज्ञान इस विद्या के विशवास को शक की नजर से देखने के लिए अवश्य ही लोगो को मजबूर कर रहा है। ज्योतिष के प्रति अविश्वास को ” Learn Vedic Astrology in Hindi ” अथवा संडे ज्योतिष” लेख के माध्यम से दूर करने का प्रयास करने जा रहा हूँ।

Learn Vedic Astrology in Hindi में आपका स्वागत है। ज्योतिष एक ऐसी विद्या है जिसके सीखने के बाद जातक को आत्मबोध हो जाता है तथा इस विद्या के माध्यम से व्यक्ति परिवार, समाज तथा देश को सकारात्मक दिशा प्रदान करता है। इस लेख के माध्यम से मैं आप सब को ज्योतिष सिखाने का प्रयास करने जा रहा हूँ आशा है यदि आप नियमित रूप में इस लेख को पढ़ेंगे तो अवश्य ही ज्योतिष को आत्मसात कर पाएंगे।

जो जातक ज्योतिष सीखना चाहते है उन्हें सर्वप्रथम जिज्ञासु बनना पड़ेगा ज्योतिष विज्ञान एक सागर है जिसकी गहराइयों को जान पाना इतना सरल नही है अतः सबसे पहले आपको ज्योतिष ज्ञान सागर की गहराइयों में उतरने के लिए संकल्प लेना पड़ेगा उसके बाद ही आप इस विद्या को आत्मसात कर पाएंगे। यदि आप सोचते है की धोड़ा बहुत ज्योतिष पढ़कर, कुछ झूठ तथा कुछ सच बोलकर अपनी दूकान चला लेंगे तो मैं यह बता दू की आपकी दूकान आपसे अधिक ज्ञान वालो से कही अधिक चल जाएगी, आप धनवान, यशवान सब बन जाएंगे परन्तु इसका प्रभाव आपके अपने बच्चो के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

ज्योतिष सीखने की जिजीविषा रखने वाले छात्रों को निम्नलिखित बातो का निश्चित ही ध्यान रखना होगा तभी ज्योतिष को सीख पाएंगे यथा —-

  1. जो भी पढ़े उसे रटने के बजाये समझने की कोशिश करें।
  2. पठित पाठ को आत्मसात करने की कोशिश करें।
  3. किसी को अपना गुरु अवश्य बनाये।
  4. किसी एक पुस्तक को भी अपना गुरु बना सकते है।
  5. इस इलेक्ट्रॉनिक युग में भी यदि आप खुद से कुंडली बनाने की आदत डालते है तो यह आपके लिए बहुत ही लाभदायक होगा।
  6. अपनी कुंडली का विश्लेषण स्वयं न करे।
  7. अपने मित्रों और रिश्तेदारों से कुण्डलियाँ लेकर उनका विस्तृत विश्लेषण करें।
  8. ज्योतिष के पारिभाषिक शब्दावली का विश्लेषण करने की कोशिश करें।
  9. ज्योतिष एक विज्ञान है अतः वैज्ञानिक दृष्टिकोण पूर्वक ज्योतिष का अध्ययन करें।
  10. शॉर्टकट रास्ता अपनाने की कोशिश न करें।
  11. शास्त्रीय सिद्धांतो को आँखमूंदकर विशवास न करे उसे अपने अनुभव के आधार पर सबसे पहले परख ले फिर उसका प्रयोग करें।
  12. ज्योतिष के मूल सिद्धांत यथा भाव,भावेश तथा भाव कारक, शुभ अशुभ ग्रहो की उच्च नीच अवस्था, ग्रहो के कारक तथा स्वभाव इत्यादि का हमेशा ध्यान रखे यदि इसका ध्यान नही रखते है तो निश्चित ही भविष्यकथन में निराशा होगी।
  13. हमेशा ज्योतिष के सिद्धांतो के आधार पर भविष्यफल कहे न की जातक के फेस वैल्यू पर।

यदि आप ज्योतिष सीखने के इच्छुक है तो उपर्युक्त बिन्दुओं पर ध्यान में रखेंगे, तो अवश्य ही इस विषय को आत्मसात कर पाएंगे।

ज्योतिष एवं उसके विभाग

ज्योतिष के मुख्यतः दो भाग हैं – गणित ज्योतिष और फलित ज्योतिष । गणित के अन्दर मुख्य रूप से गणित के माध्यम से जन्म कुण्डली का निर्माण किया जाता है। इसमें दिनांक, समय तथा स्थान के हिसाब से ग्रहों की स्थिति की गणना की जाती है। वर्तमान समय में कंप्यूटर के माध्यम से कुंडली का निर्माण चंद सेकंड में हो जाता है इस कारण आजकल हस्तलिखित गणना का प्रचलन धीरे धीरे समाप्त ही हो गया है। प्रस्तुत “वैदिक ज्योतिष सीखे” श्रृंखला में मै गणित ज्योतिष की चर्चा न करके सीधे फलित ज्योतिष की चर्चा करूँगा।

फलित ज्योतिष में गणित के माध्यम में निर्मित ग्रहों, राशि तथा लग्न के आधार पर जातक का भविष्यफल बताया जाता है। अपना भविष्य सुनना सबको अच्छा लगता है इसलिए यह ज्योतिष का यह भाव ज्यादा महत्त्वपूर्ण हो जाता है हलाकि बिना गणित के फलित ज्योतिष की कल्पना भी नही की जा सकती है।

जानें ! भाव, भावेश, राशि तथा ग्रह

सम्पूर्ण ज्योतिष शास्त्र  9 ग्रहों, 12 राशियों, 12 भावों-भावेश और 27 नक्षत्रों पर आधारित है। ग्रह, राशि, भाव, भावेश और नक्षत्र के आधार पर भविष्य कथन किया जाता है। ज्योतिष सीखने के लिए नवग्रह की उपासना बहुत जरुरी है अतः ज्योतिष पढ़ने से पहले एक बार अवश्य ही नवग्रह की उपासना करनी चाहिए।

ॐ ब्रह्मा मुरारीस्त्रिपुरांतकारी भानु: शशी भूमिसुतो बुधश्च।
गुरुश्च शुक्र: शनिराहुकेतवः कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम॥

ग्रह एवं उनके राशि | Planets and their zodiac sign

ग्रहअंग्रेजी नामग्रह की राशिराशि का अंग्रेजी नाम
सूर्यSunसिंहLeo
चंद्रMoonकर्कCancer
मंगलMarsमेष & वृश्चिकAries  & Scorpio
बुधMercuryमिथुन & कन्याGemini  & Virgo
गुरूJupiterधनु & मीनSagittarius  &  Pisces
शुक्रVenusवृष & तुलाTaurus  &  Libra
शनिSaturnमकर & कुम्भCapricorn & Aquarius
राहुRahu —–—–
केतुKetu——-——-

 

 
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