Navratri 2017 : कलश स्थापना और पूजा का समय

आइये जानते है इस वर्ष शारदीय नवरात्री/ Navratri 2017 : कलश स्थापना और पूजा का समय क्या है। इस वर्ष नवरात्री पूजन 21 सितंबर 2017 से प्रारम्भ है। उस दिन प्रथम नवरात्र (प्रतिपदा) है। नवरात्रि के प्रथम दिन माता शैलपुत्री के रूप में विराजमान होती है। उस दिन कलश स्थापना के साथ-साथ माँ शैलपुत्री की पूजा होती हैऔर इसी पूजा के बाद मिलता है माँ का आशीर्वाद।

 

Navratri 2016 : कलश स्थापना और पूजा का समय

कलश स्थापना और पूजा का समय | Timing of Pooja and  kalash Sthapna 

भारतीय शास्त्रानुसार  नवरात्रि पूजन तथा कलशस्थापना आश्विन शुक्ल प्रतिपदा के दिन सूर्योदय  के पश्चात १० घड़ी तक अथवा अभिजीत मुहूर्त (Abhijit muhurt) में करना चाहिए। कलश स्थापना(Kalash Sthapna) के साथ ही नवरात्र  प्रारम्भ हो जाता है। यदि प्रतिपदा के दिन चित्रा नक्षत्र (Chitra Nakshatra) हो तथा वैधृति योग हो तो वह दिन दूषित होता है।  इस बार 21 सितंबर 2017 को प्रतिपदा के दिन न हीं चित्रा नक्षत्र है तथा न हीं वैधृति योग  है परन्तु शास्त्र यह भी कहता है की यदि प्रतिपदा के दिन ऐसी स्थिति बन रही हो तो उसका परवाह न करते हुए अभिजीत मुहूर्त में घट स्थापना तथा नवरात्र पूजन कर लेना चाहिए।

निर्णयसिन्धु के अनुसार —

  • सम्पूर्णप्रतिपद्येव चित्रायुक्तायदा भवेत। 
  • वैधृत्यावापियुक्तास्यात्तदामध्यदिनेरावौ।।
  • अभिजितमुहुर्त्त यत्तत्र स्थापनमिष्यते।

अर्थात अभिजीत मुहूर्त में ही कलश स्थापना करना चाहिए।  भारतीय ज्योतिषशास्त्रियों के अनुसार नवरात्रि पूजन द्विस्वभाव लग्न (Dual Lagan) में करना श्रेष्ठ होता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार मिथुन, कन्या,धनु तथा कुम्भ राशि द्विस्वभाव राशि है। अतः हमें इसी लग्न में पूजा प्रारम्भ करनी चाहिए। 21 सितंबर 2017 प्रतिपदा के दिन हस्त नक्षत्र  और ब्रह्म योग होने के कारण सूर्योदय के बाद तथा अभिजीत मुहूर्त में  घट/कलश स्थापना  करना चाहिए।

Navratri 2016 : कलश स्थापना और पूजा का समय

प्रथम(प्रतिपदा) नवरात्र हेतु पंचांग विचार

  • दिन(वार) –          गुरूवार
  • तिथि –                 प्रतिपदा
  • नक्षत्र –                 हस्त
  • योग –                   ब्रह्म
  • करण –                 बालव
  • पक्ष –                    शुकल
  • मास –                  आश्विन
  • लग्न –                 कन्या (द्विस्वभाव)
  • लग्न समय –       6:03 से 8:22
  • मुहूर्त –                 अभिजीत
  • मुहूर्त समय –       11:49 से 12:38 तक
  • राहु काल –           13:45 से 15:16 तक
  • विक्रम संवत –     2074

इस वर्ष अभिजीत मुहूर्त (11:49 से12:38)  जो ज्योतिष शास्त्र में स्वयं सिद्ध मुहूर्त माना गया  वृश्चिक लग्न  में पड़ रहा है अतः वृश्चिकलग्न में ही पूजा तथा कलश स्थापना  करना  बहुत अच्छा नहीं है।

कन्या लग्न में कलश स्थापना करना श्रेष्ठकर होगा यह समय 5 : 55 से 8 : 10 तक है अतः कलश स्थापना इसी लग्न में करे तो अच्छा रहेगा

Navratri 2017 : माता दुर्गा के प्रथम रूप

माँ दुर्गा के प्रथम रूप “शैलपुत्री” की उपासना के साथ नवरात्रि  आरम्भ होती है। शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में उत्पन्न होने के कारण, माँ दुर्गा के इस रूप का नाम शैलपुत्री है। पार्वती और हेमवती भी इन्हीं के नाम हैं। माता के दाएँ हाथ में त्रिशूल तथा बाएँ हाथ में कमल का फूल है। माता का वाहन वृषभ है।माता शैलपुत्री की पूजा-अर्चना इस मंत्र के उच्चारण के साथ करनी चाहिए-

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

Navratri 2017 : पूजन सामग्री

माँ दुर्गा की सुन्दर प्रतिमा, माता की प्रतिमा स्थापना के लिए चौकी,  लाल वस्त्र , कलश/ घाट , नारियल का फल, पांच पल्लव आम का, फूल, अक्षत, मौली, रोली, पूजा के लिए थाली , धुप और अगरबती, गंगा का जल, कुमकुम, गुलाल पान, सुपारी, चौकी,दीप, नैवेद्य,कच्चा धागा, दुर्गा सप्तसती का किताब ,चुनरी, पैसा, माता दुर्गा की विशेष कृपा हेतु संकल्प तथा षोडशोपचार पूजन करने के बाद, प्रथम प्रतिपदा तिथि को, नैवेद्य के रूप में गाय का घी माता को अर्पित करना चाहिए तथा पुनः वह घी  किसी ब्राह्मण को दे देना चाहिए।

Navratri 2017 : पूजा का फल

वैसे तो गीता में कहा गया है- कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन अर्थात आपको केवल कर्म करते रहना चाहिए फल की चिंता नहीं करनी चाहिए। फिर भी प्रयोजनम् अनुदिश्य मन्दो अपि न प्रवर्तते सिद्धांतानुसार विना कारण मुर्ख भी कोई कार्य नहीं करता है तो भक्त कारण शून्य कैसे हो सकता है। माता सर्व्यापिनी तथा सब कुछ जानने वाली है एतदर्थ मान्यता है कि माता शैलपुत्री की भक्तिपूर्वक पूजा करने से मनुष्य की सभी मनोकामनाये पूर्ण होती है तथा भक्त कभी रोगी नहीं होता अर्थात निरोगी हो जाता है।

Navratri | नवरात्री में कन्या पूजन विधि महत्त्व तथा लाभ

Diwali Pujan Vidhi / दीपावली पूजन कैसे करें

नवरात्री में कैसे करें कलश/घट स्थापना | Kalash Sthapna Vidhi

नवरात्रि में माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा कैसे करे

 
Tagged with 
About Dr. Deepak Sharma
Dr. Deepak Sharma is an expert in Vedic Astrology and Vastu with over 21 years experience in Horary or Prashn chart, Career, Business, Marriage, Compatibility, Relationship and so many other problems in life path. Remedies suggested by him like Mantra, Puja, donation, Rudraksh Therapy, Gemstone etc. Phone No 9643415100 ( Please don`t call for free prediction ) email - drdk108@gmail.com. For an appointment, go to Astro Services

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *