Santan Yoga | जाने आपकी कुंडली में संतान सुख है या नहीं

Santan Yoga | जाने आपकी कुंडली में संतान सुख है या नहीं | ज्योतिष विज्ञान आपके जीवन में आने वाली समस्याओं का समाधान  तथा आपके अंदर उत्पन्न  प्रश्नो का समाधान करता आया है और करता रहेगा।  अपने ज्योतिषीय जीवन यात्रा में जो मैंने अनुभव किया है कि आज हर व्यक्ति उत्तम संतान की इच्छा रखता है क्योकि अक्सर मुझसे यह प्रश्न किया जाता है —

 
  1. क्या मेरे कुंडली में संतान योग है ?
  2. यदि संतान योग है तो पुत्र है या पुत्री या दोनों ?
  3. क्या मेरे बच्चे मेरा ख्याल रखेंगे ?
  4. क्या मेरे बच्चे मुझसे प्रेम करते है ?
  5. क्या मेरे बच्चे की शिक्षा अच्छी होगी ?

किसी भी कुण्डली में स्थित ग्रहों के आधार पर संतान सुख के विषय में जाना जा सकता है की जातक को संतान सुख है या नहीं और यदि है तो कितना। वास्तव में संतान सुख प्रारब्ध से जुड़ा है इसलिए कई बार हम कहते है की मेरे नियति का ही दोष है जो मैं संतान सुख से वंचित हूँ । संतान सुख कब और कितना मिलेगा यह भी प्रारब्ध से जुड़ा हुआ है। ज्योतिषी इन सभी प्रश्नो का उत्तर आपके कुंडली में स्थित ग्रह तथा भाव के साथ कैसा सम्बन्ध है उसके आधार पर देता है।

पंचम भाव संतान भाव है यही वह स्थान है जहा से हम गर्भ से सम्बंधित विचार करते है इसी कारण इस भाव का बहुत ही महत्त्व है। इस भाव का कारक ग्रह गुरु है तथा संतान का कारक भी गुरु ग्रह है। अतः यदि पंचम भाव तथा उस भाव का स्वामी तथा इस भाव एवं संतान का कारक ग्रह गुरु शुभ स्थिति में है तो अवश्य ही संतान सुख मिलता है।

भारतीय हिन्दू संहिता में गुरु ऋण मातृ ऋण तथा पितृ ऋण को महत्त्वपूर्ण माना गया है पुत्र के बिना पितृ ऋण से व्यक्ति उऋण नहीं हो सकता ऐसा शास्त्रोक्त है। पुत्र की प्राप्ति से हम अपने कुलवंश को आगे बढ़ाते है अतः पुत्र का महत्त्व कही ज्यादा बढ़ जाता है। कहा गया है —

अपुत्रस्य गति नास्ति शास्त्रेषु श्रुयते मुने 

अर्थात् पुत्रहीन व्यक्ति को सद्गति नहीं मिलती।

जन्मकुंडली में कौन सा भाव संतान भाव है ?

किसी भी जन्म कुंडली में पंचम भाव ( Fifth House ) संतान भाव होता है।  पंचम भाव में स्थित ग्रह, पंचम भाव का स्वामी ग्रह तथा उस भाव को देखने वाला ग्रह यह सब आपके संतान के सम्बन्ध में विशेष जानकारी देता है।

जन्मकुंडली में कौन है संतान कारक ग्रह ?

किसी भी जन्मकुंडली में ” वृहस्पति / गुरु / Jupiter” ग्रह संतान ( Child ) का कारक ग्रह होता है।

कुंडली में बृहस्पति ग्रह की स्थिति अर्थात उच्च, नीच, केंद्र अथवा त्रिकोण के आधार पर आकलन किया जाता है की आपके बच्चे कितने होनहार है, होंगे या आपका संतान सुख कैसा है वा होगा।

कैसे करे ? संतान सुख का निर्धारण

1.  किसी भी जन्मकुण्डली में यदि पंचमेश बली उच्च  या मित्र राशि होकर लग्न, पंचम, सप्तम अथवा नवम भाव में स्थित हो तथा कोई भी पापी वा अशुभ ग्रह की न ही दृष्टि हो और न ही साथ हो तो वैसे जातक को संतान सुख प्राप्त होता है।

लग्नातपुत्रकलत्रभे शुभ पति प्राप्तेsथवाsलोकिते

चन्द्रात वा यदि सम्पदस्ति हि तयोर्ज्ञेयोsन्यथाsसम्भवः।

2. अर्थात यदि लग्न से पंचम भाव में शुभ ग्रह का योग या पंचमेश पंचम में ही हो तथा पंचम भाव को उसका स्वामी देखता हो या शुभ ग्रह देखता हो तो पुत्र सुख की प्राप्ति होती है।

जन्म कुंडली में लग्न तथा चन्द्र राशि से पंचम भाव के स्वामी और बृहस्पति/ गुरु अगर शुभ स्थान  वा केंद्र या त्रिकोण में स्थित तथा किसी अशुभ ग्रह से दृष्ट नहीं हैं तो आपको निश्चित ही संतान सुख हैं।

3. यदि कुण्डली में पंचम भाव का स्वामी तथा गुरू बली अवस्था में हो और लग्नेश की दृष्टि गुरू पर हो तो जन्म लेने वाला संतान आज्ञाकारी होता है।

4. पंचम भाव में अगर वृष, सिंह, कन्या अथवा वृश्चिक राशि सूर्य के साथ हों एवं अष्टम भाव में शनि और लग्न स्थान पर मंगल विराजमान हों तो संतान सुख विलम्ब से प्राप्त होता है.

5. संतान कारक ग्रह बृहस्पति (Jupiter) अगर बली हो साथ ही लग्न स्वामी तथा पंचम भाव के स्वामी के साथ दृष्टि या युति सम्बन्ध हो तो निश्चित ही संतान सुख होता है।

6. लग्नेश व नवमेश यदि जन्मकुंडली( Horoscope)  में सप्तम भाव में स्थित हैं तो संतान सुख प्राप्त मिलता है।

7. एकादश भाव में शुभ ग्रह बुध, शुक्र, अथवा चंद्र में से एक भी ग्रह हो तो संतान का सुख मिलता है इसका मुख्य कारण है की इस स्थान से ग्रह पुत्र /संतान भाव को देखता है।

8. पंचम भाव में यदि राहु या केतु हो तो संतान योग वा संतान सुख मिलता है।

9. नवम भाव में गुरू, शुक्र एवं पंचमेश हो तो उत्तम संतान का योग बनता है

10. कुण्डली में लग्न से पंचम भाव शुक्र अथवा चन्द्रमा के वर्ग में हों तथा शुक्र और चन्द्रमा से युक्त हों उसके कई संतानें होती हैं।

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