Shani Jayanti 2018 | शनि जयंती 2018 | पूजा विधि तथा लाभ

Shani Jayanti 2018 | शनि जयंती 2018 | पूजा विधि तथा लाभ . शनि जयंती प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की अमावस्या को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। शनि देव सूर्य पुत्र है। ज्योतिष में इन्हे न्याय तथा मृत्यु का देवता माना जाता है। इनका वर्ण काला है यही कारण इनको काला रंग बहुत ही पसंद है। ज्योतिष में इनको तीसरी सप्तम तथा दशम दृष्टि दी गई है। शनि सबसे धीरे धीरे चलने वाला ग्रह है। योगी और तपस्वी का जीवन व्यतीत करना इन्हे बहुत ही पसंद है यही कारण है की शनि की दशा में व्यक्ति मोक्ष की बात करने लगता है। शनि जयंती के दिन भारत में स्थित प्रमुख शनि मंदिरों में भक्त शनि देव से संबंधित पूजा पाठ करते हैं तथा शनि पीड़ा से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं।

 

Shani Jayanti 2018 | शनि जयंती 2018 

साल 2018 में शनि जयंती का पावन पर्व दिनांक 15 मई को मनाया जाएगा। यह पर्व पूर देश में बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन शनि भक्त शनि देव को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा अर्चना करते है।

दिन – मंगलवार
अमावस्या तिथि आरम्भ = 14/मई /2018 10:17 से
अमावस्या तिथि समाप्त = 15/मई /2018 07:48 तक

शनि जयंती पूजा विधि (Shani Jayanti Puja Vidhi in Hindi)

सामान्यतः हमलोग शनिवार के दिन शनि देव की पूजा करते है। यह पूजा कल्याणप्रद और शनि की कुदृष्टि से हमें बचाती है। शनि जयंती के दिन पूरे विधि- विधान से पूजा करना चाहिए। पूजा में किसी भी प्रकार का प्रमाद नहीं होना चाहिए क्योकि हम सभी जानते है शनि न्याय और मृत्यु के देवता है अतः किसी भी कारण से हमें कोताही न करने से बचाना चाहिए। बल्कि विशेष ध्यान देना अनिवार्य होता है। कहा जाता है कि यदि शनि देव क्रोधित हो जाते हैं तो घर की सुख-शांति समाप्त हो जाती है और परेशानी ही परेशानी उतपन्न हो जाता है।

शनि जयंती के दिन सर्वप्रथम स्नानादि नित्य क्रिया से निवृत्य होकर एक लकड़ी के पाट पर काला कपड़ा बिछाकर उस पर शनिजी की प्रतिमा या फोटो या एक सुपारी.रख देना चाहिए। इसके बाद उसके दोनों ओर शुद्ध तेल का दीप तथा धूप जलाना चाहिए। इस शनि देव के प्रतीक रूप प्रतिमा अथवा सुपारी को जल, दुग्ध, पंचामृत, घी, इत्र से स्नान कराकर उनको इमरती, तेल में तली वस्तुओं का नैवेद्य चढ़ाना चाहिए । नैवेद्य चढाने से पहले उन पर अबीर, गुलाल, सिंदूर, कुंकुम एवं काजल लगाकर नीले या काले फूल अर्पित करना चाहिए उसके बाद नैवेद्य, फल व ऋतु फल के संग श्रीफल अर्पित करना चाहिए । इस पंचोपचार पूजा के नाद इस मंत्र का जप कम से कम एक माला जरूर करना चाहिए ।
ॐ प्रां प्रीं प्रौ स: शनये नमः॥
अथवा
ॐ शं शनैश्चराय नमः।
मंत्र का जाप करना चाहिए। पश्चात शनि आरती करके उनको साष्टांग नमन करना चाहिए।  शनि देव के पूजा करने के बाद अपने सामर्थ्यानुसार दान देना चाहिए। इस दिन पूजा-पाठ करके काला कपड़ा, काली उड़द दाल, छाता, जूता, लोहे की वस्तु का दान तथा गरीब वा निःशक्त लोगो को मनोनुकूल भोजन कराना चाहिए ऐसा करने से शनि देव प्रसन्न होते है तथा आपके सभी कष्टों को दूर कर देते हैं।

शनि देव के प्रिय वस्तु

शनि देव को प्रसन्न करने के लिए उनके प्रिय वस्तु का दान या सेवन करना चाहिए। शनि के प्रिय वास्तु है— तिल, उड़द, मूंगफली का तेल, काली मिर्च, आचार, लौंग, काले नमक आदि का प्रयोग यथा संभव करना चाहिए।

शनि देव को प्रसन्न करने के लिए क्या करना चाहिए

  1. अपने मता पिता, विकलांग तथा वृद्ध व्यक्ति की सेवा और आदर-सम्मान करना चाहिए। 
  2. हनुमानजी की आराधना करनी चाहिए।
  3. दशरथ कृत शनि स्तोत्र  का नियमित पाठ करे
  4. कभी भी भिखारी, निर्बल-दुर्बल या अशक्त व्यक्ति को देखकर मज़ाक या परिहास नहीं करना चाहिए।
  5. शनिवार के दिन छाया पात्र (तिल का तेल एक कटोरी में लेकर उसमें अपना मुंह देखकर शनि मंदिर में रखना ) शनि मंदिर में अर्पण करना चाहिए। तिल के तेल से शनि देव शीघ्र ही प्रसन्न होते है।
  6. काली चीजें जैसे काले चने, काले तिल, उड़द की दाल, काले कपड़े आदि का दान सामर्थ्यानुसार नि:स्वार्थ मन से किसी गरीब को करे ऐसा करने से शनिदेव जल्द ही प्रसन्न होकर आपका कल्याण करेंगे।
  7. पीपल की जड़ में केसर, चंदन, चावल, फूल मिला पवित्र जल अर्पित करें।
  8. शनिवार के दिन तिल का तेल का दीप जलाएं और पूजा करें।
  9. सूर्योदय से पूर्व शरीर पर तेल मालिश कर स्नान करें।
  10. तेल में बनी खाद्य सामग्री का दान गाय, कुत्ता व भिखारी को करें।
  11. शमी का पेड़ घर में लगाए तथा जड़ में जल अर्पण करे।
  12. मांस मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए

शनि देव की पूजा से लाभ | Benefit from Shani worship

  1. मानसिक संताप दूर होता है।
  2. घर गृहस्थी में शांति बनी रहती है।
  3. आर्थिक समृद्धि के रास्ते खुल जाते है।
  4. रुका हुआ काम पूरा हो जाता है।
  5. स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या धीरे धीरे समाप्त होने लगती है।
  6. छात्रों को प्रतियोगी परीक्षा में सफलता मिलती है।
  7. राजनेता मंत्री पद प्राप्त करते है।
  8. शारीरिक आआलस्यपन दूर होता है। 

शनि देव के जन्म से जुड़ी पौराणिक कथा  | Shani janma katha

शनिदेव के जन्म से जुडी एक कथा ‘स्कन्द पुराण’ में आयी है जिसके अनुसार सूर्य देव का विवाह राजा दक्ष की कन्या “संज्ञा” के साथ हुआ था। सूर्य देव को “संज्ञा” से तीन पुत्रों का जन्म हुआ। सूर्य देव ने उनका नाम यम, यमुना और मनु रखा। “संज्ञा”सूर्य देव के तेज से परेशान रहती थी वह उनके तेज को अधिक समय तक नहीं सहन कर पायी। इसलिए उसने अपनी प्रतिरूप “छाया” को अपना उत्तरदायित्व देकर सूर्य देव को छोड़ कर चली गई। छाया शिव भक्त थी भक्ति तथा तपस्या में लीन रहती थी परिणाम स्वरूप छाया के गर्भ से उत्पन्न शिशु जिनका नाम शनि रखा गया काले वर्ण के हुए काले वर्ण के कारण पिता सूर्य देव छाया के ऊपर लांछना लगाते हुए बोले की यह मेरा पुत्र नहीं हो सकता।

श्री शनिदेव के अन्दर जन्म से माँ कि तपस्या शक्ति का बल था; उन्होंने देखा कि मेरे पिता , माँ का अपमान कर रहे है | उन्होने क्रूर दृष्टि से अपने पिता को देखा, तो पिता के शरीर का रंग काला सा हो गया | घोडों की चाल रुक गयी | रथ आगे नहीं चल सका | सूर्यदेव परेशान होकर शिवजी को पुकारने लगे | शिवजी ने सूर्यदेव को सलाह दी की आपके द्वारा नारी व पुत्र दोनों का अपमान हुआ है इसलिए यह दोष लगा है | सूर्यदेव ने अपनी गलती स्वीकार किया तथा क्षमा मांगी और पुन: सुन्दर रूप एवं घोडों की गति प्राप्त की | तब से श्री शनिदेव पिता के विरोधी, शिवजी के भक्त तथा माता के प्रिय हो गए |

 
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