Venus Remedies | शुक्र ग्रह की शांति हेतु मंत्र पूजा दानादि विधि

Venus Remedies | शुक्र ग्रह की शांति हेतु मंत्र पूजा दानादि विधि . शुक्र का देवाधिदेव महादेव से घनिष्ठ सम्बन्ध है और देवराज इंद्र इसके अधिदेवता है परन्तु शुक्र स्वयं दैत्यों के संरक्षक एवं पथ प्रदर्शक है। शुक्र ग्रह इस रहस्य को जानने से शुक्र की क्रियात्मक क्षमता विकास क्रम में इसका योगदान तथा फलित ज्योतिष में इसका ऐश्वर्य प्रतिष्ठा एवं पारिवारिक सुख का कारक होना भली भाति समझ में आ सकता है।

 

जन्मकुंडली में शुक्र की महत्ता | Importance of Venus Planet

जन्मकुंडली में शुक्र शुभ या ग्रह के रूप में स्थित है। किसी भी जातक की अपूर्व सौंदर्य का द्योतक शुक्र ग्रह ही है। शुक्र जातक में इन्द्रिय संवेदनशीलता के कारण एकत्व स्थापित करता है। फलित ज्योतिष में इन्द्रिय सुख की तृप्ति शुक्र का प्रधान गुण माना गया है। इन्द्रियों सुख के साथ साथ यह भौतिक सुख भी प्रदान करता है परन्तु शुक्र का प्रधान लक्ष्य परमात्मा की इस अपूर्व सृष्टि को आगे बढ़ाना ही है।

शुक्र कारक ग्रह है | Significator of Venus Planet

ज्योतिष शास्त्र में शुक्र ग्रह स्त्री, सुंदरता, मकान, कला, संगीत, प्रेम, विवाह, लाभ, मुद्रा, सुगंध, सेक्स, यौन, सुख, गुप्त रोग, चित्रकार, रस, गाय, फिल्म, इत्र, स्त्री रोग, वाहन इत्यादि का कारक है। पुरुष की कुंडली में शुक्र ग्रह पति का कारक ग्रह है।

शुक्र और स्वास्थय | Venus and Health

शुक्र ग्रह स्वास्थ्य की दृष्टि मिश्रित फल देने वाला है। शरीर में स्थित आँख, प्रजननं व्यवस्था, कंठ गाल किडनी इत्यादि पर शुक्र का विशेष रूप से प्रभाव होता है। यदि जन्मकुंडली में शुक्र ग्रह पीड़ित है तो उपर्युक्त अवयवों में विकार संभव है। विभिन्न राशियों में शुक्र का फल

शुक्र ग्रह शुभ तथा अशुभ दोनों फल देता है | Benefit of Venus Planet

शुक्र ग्रह यदि अनुकूल स्थिति में है तो जातक को दाम्पत्य सुख तथा भौतिक सुख प्रदान करता है यही नहीं यह ग्रह समाज तथा परिवार में जातक को मान-सम्मान भी दिलाता है। यदि शुक्र जन्मकुंडली में शुभ स्थिति में है तो यह जातक को वाहन तथा मकान प्राप्त करने की इच्छा को पूरा करने की शक्ति रखता है परन्तु यदि अगर शुक्र प्रतिकूल है तो इंसान की मकान, वाहन इत्यादि की इच्छापूर्ति से वंचित होना पड़ता है।

शुक्र ग्रह शांति हेतु आराध्यदेव

शुक्र ग्रह के लिए आराध्य देवी लक्ष्मी तथा इंद्राणी है। अतः शुक्र की शांति हेतु लक्ष्मी तथा इंद्राणी की आराधना करनी चाहिए।

किस मंत्र से करे शुक्र के दुष्प्रभाव को कम | Venus Mantra

जन्मकुंडली में शुक्र के दुष्प्रभाव को दूर करने के लिए शुक्र मंत्र का जाप करने से अनेक प्रकार की समस्याओ से निजात पा सकते है। यदि आप शुक्र के अशुभ प्रभाव से पीड़ित हैं या जन्मकुंडली में शुक्र ग्रह अशुभ स्थिति में है, तो आपको यह उपाय अवश्य करना चाहिए। शुक्र मन्त्र का जप शुक्रवार के दिन से आरम्भ करना चाहिए।

शुक्र का तांत्रिक मंत्र | Tantrik Mantra for Venus

“ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नम:”

ॐ शुं शुक्राय नमः

ॐ ह्रीं श्रीं श्रीं शुक्राय नमः

शुक्र का गायत्री मंत्र | Gayatri Mantra for Venus

ॐ भृगुजाय विदहे दिव्यदेहाय धीमहि तन्न: शुक्र प्रचोदयात

शुक्र मंत्र जप संख्या

जप संख्या – 20000
हवन -2000
तर्पण – 200
मार्जन – 20
ब्राह्मण भोजन – 2

शुक्र शांति हेतु दान | Donation for Venus Planets

शुक्र ग्रह के लिए निम्नलिखित वस्तुओ का दान करना चाहिए। दान से पूर्व लक्ष्मीजी तथा इन्द्राणी जी की पूजा करनी चाहिए उसके बाद नवग्रह की पूजा करे। शुक्र से संबंधित वस्तुओं का दान शुक्रवार के दिन संध्या में जरूरतमंद युवती को दान देकर शुरुआत करना चाहिए।

श्वेत चंदन
चीनी स्वेत घोड़ा
गाय
हीरा
सुगन्धि
श्वेत पुष्प

शुक्र ग्रह के लिए तांत्रिक टोटका

अपने भोजन में से प्रथम ग्रास गाय के लिए निकालकर गाय को खिलाये।
महिला या गरीब संस्था को दान दे या उसमे स्वयं दान दे।

शुक्र ग्रह की शांति हेतु व्रत

शुक्र ग्रह की पीड़ा को शांत करने के लिए जातक को शुक्रवार का व्रत करना चाहिए। यह ज्येष्ठ मास के शुक्लपक्ष के प्रथम शुक्रवार से आरम्भ करना चाहिए।

शुक्र ग्रह के लिए कौन सा रत्न धारण करें

यदि शुक्र ग्रह आपके कुंडली में शुभ है या योगकारी है या लग्न का स्वामी है और उसे बलप्रदान करना है तो वैसी स्थिति में जातक को चांदी में हीरा ( Diamond)  की अंगूठी पहननी चाहिए। यदि आप हीरा पहनने में समर्थ नहीं है तो जरकन ( Jarkan) पहनना चाहिए।

 
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