What is Rudraksh – रुद्राक्ष क्या है

What is Rudraksh – रुद्राक्ष क्या है जानने की जिज्ञासा प्रायः अध्यात्म से जुड़े व्यक्तियों में अवश्य होती है। रुद्राक्ष धारण करना सर्वसिद्धिदायक तथा सर्वफलसाधक है। पौराणिक शास्त्रों में रूद्राक्ष के सम्बन्ध में कहा गया है की जिस प्रकार स्वयं रूद्र रुद्राक्ष धारण करके ही रूद्रत्व को प्राप्त हुए, मुनि सत्य-संकल्प को प्राप्त करते है तथा ब्रह्म ब्रह्मत्व को प्राप्त होते है उसी प्रकार वर्तमान युग में विधिपूर्वक मंत्रों से अभिमंत्रित कर रुद्राक्ष धारण करने से व्यक्ति “स्वयं के व्यक्तित्व” को प्राप्त करता है।

 

रद्राक्षधारणादेव रुद्रो रूद्रत्वमाप्नुयात्। मुनयः सत्यसंकल्पा ब्रह्मा ब्रह्मत्वमागतः।।

rudraksh

Rudraksh / रुद्राक्ष के शाब्दिक अर्थ

रुद्राक्ष की उत्पत्ति के सम्बन्ध में कहा जाता है कि यह रूद्र की आँखो से उत्पन्न  हुआ है। इसी कारण इसका नाम रुद्राक्ष पड़ा (रूद्र+अक्षि) अर्थात “रूद्र की आँखवाला” या रूद्र की आँखों से उत्पन्न। रुद्राक्ष बीज में आँख को लक्षित करनेवाली एक या एक से अधिक रेखाएं होती है। यही रेखाएं अक्षि अर्थात आँख का प्रतीक होता है। अनानास एक प्रकार का फल है जो खट्टा मीठा लगता है संस्कृत में इसे “अनन्ताक्ष “ कहा जाता है अनन्ताक्ष का शाब्दिक अर्थ है अनंत अक्षियों वाला। वास्तव में यह फल देखने में भी अनंत आँख वाला जैसा ही लगता है। अतः यह स्पष्ट है कि अक्ष शब्द अक्षि का ही वाचक है। “अक्षम” का शाब्दिक अर्थ इन्द्रिय-विषय होता है। रुद्रेन्द्रिय के रूप में पुनः इसका अर्थ रूद्र की आँख तक पहुचता है क्योंकि रूद्र के साथ इन्द्रियों में प्रमुख है उनकी तीनों आँख यही कारण है की शिव को त्रिनेत्र और त्र्यंबक के नाम से जाना जाता है।

शिव के डमरू से निष्पन्न १४ प्रत्याहार संस्कृत व्याकरण का मूलाधार है  जिसे माहेश्वर सूत्र के नाम से भी जाना जाता है।

14 महेश्वर सूत्र

  1. अ इ उ ण् ।
  2. ॠ ॡ क् ।
  3. ए ओ ङ् ।
  4. ऐ औ च् ।
  5. ह य व र ट् ।
  6. ल ण् |
  7. ञ म ङ ण न म् ।
  8. झ भ ञ् ।
  9. घ ढ ध ष् ।
  10. ज ब ग ड द श् ।
  11. ख फ छ ठ थ च ट त व् ।
  12. क प य् ।
  13. श ष स र् ।
  14. ह ल् ।

पाणिनि ने अष्टाध्यायी की रचना में प्रत्याहार का प्रयोग किया है। यही नहीं आज कंप्यूटर(computer) में भी इसका प्रयोग होता है। यही कारण है कि संस्कृत को कंप्यूटर के लिए सबसे अच्छा भाषा माना जाता है। प्रत्याहार की चर्चा का मूल उद्देश्य है रुद्राक्ष का शिव से सम्बन्ध दिखाना जिस प्रकार शिव के डमरू से चौदह प्रत्याहार निकले थे उसी प्रकार रुद्राक्ष के सम्बन्ध में जो शास्त्रों में उल्लेख मिलता है वह भी चौदहमुखी रुद्राक्ष का ही उल्लेख मिलता है।

रुद्राक्ष के नौ पर्यायवाची शब्द मिलता है। रुद्राक्ष, सर्वाक्ष,शिवाक्ष, भूतनाशन, पावन, शिवप्रिय, तृणमेरु, अमर तथा पुष्पचामर।

Rudraksh / रुद्राक्ष से लाभ

रुद्राक्ष शरीर के अवयवों को बलवान बनाता है। यह धातु को पुष्ट तथा रक्त विकार नष्ट करता है। शरीर के बाह्य तथा आंतरिक कीटाणुओं को मारता है। शरीर में होने वाले अनेक प्रकार के रोगों को नष्ट करने की क्षमता रुद्राक्ष में विद्यमान है। यह कफ, वायुविकार, मानसिक संताप, चेचक, प्रसूति रोग, पक्षाघात, स्नायु निर्बलता इत्यादि रोगों को ठीक करता है। इससे रक्त चाप तथा ह्रदय रोग दूर होते है। स्वाद की दृष्टिकोण से यह खट्टा, गर्म और रुचिकर होता है। रुद्राक्ष का प्रयोग महाऔषधि के रूप में किया जाता था, है और रहेगा। रुद्राक्ष में इतनी शक्ति है की विधिपूर्वक धारण करने वाले व्यक्ति के समस्त शारीरिक, मानसिक तथा आध्यात्मिक संतापों को दूर कर देता है।

ग्रहो के अनिष्ट से बचने के लिए रुद्राक्ष का प्रयोग करना चाहिए। यह भूत-प्रेत आदि का शमन करने वाला भी है। रुद्राक्ष के माला पर सभी प्रकार के मंत्रो का जाप किया जा सकता है।

वास्तव में अर्थ एवं पर्याय की दृष्टि से रुद्राक्ष अत्यंत ही गूढ़ार्थ रूप में भारतीय संस्कृति और सभ्यता में  प्रतिष्ठित है। यह सांस्कृतिक चेतना का नियामक शब्द है तो वही साधना को सिद्धि प्रदान करने वाला पद है।

इसी कारण रुद्राक्ष के सम्बन्ध में कहा गया है कि रुद्राक्ष धारण से श्रेष्ठ कोई दूसरी वस्तु नहीं है –

“रूद्राक्षधारणाच्च श्रेष्ठं न किंचिदपि विद्यते। “

Rudraksh

 

 
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