Somvar Vrat Aarti | सोमवार व्रत आरती

Somvar Vrat Aarti | सोमवार व्रत आरतीSomvar Vrat Aarti | सोमवार व्रत आरती . सोमवार व्रत शिवजी को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। वैसे तो भक्त जन सम्पूर्ण वर्ष प्रत्येक सोमवार के दिन व्रत करते रहते है परन्तु चैत्र, शुक्लाष्टमी तिथि, आर्द्र नक्षत्र, सोमवार को अथवा श्रावण मास के प्रथम सोमवार को व्रत शुरू करने का विशेष ही महत्त्व है। सोमवारी व्रत में भक्त जन उपवास रखते हैं तथा किसी शिव मंदिर में जाकर, शिवलिंग के ऊपर बेलपत्र, धतूरा तथा जल वा दुग्ध का अभिषेक करते है साथ ही प्रसाद के रूप में फल चढ़ाते है। इस प्रकार विधि पूर्वक पूजा अर्चना करने के बाद शिवजी की आरती करनी चाहिए। कहा जाता है की बिना आरती के आपके द्वारा किये व्रत का पूर्ण फल नही मिलता है अतः आरती अवश्य ही करनी चाहिए।  सोमवार व्रत प्रारम्भ तिथि, कथा, विधि

शिवजी की पूजा अर्चना करते समय निम्न मंत्र का अवश्य जप करना चाहिए।

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारं ।
सदा वसन्तं ह्रदयारविन्दे भवं भवानी सहितं नमामि ॥

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥

ॐ नमः शिवाय ।

Somvar Vrat Aarti | सोमवार व्रत आरती

आरती शिवजी की

ॐ जय शिव ओंकारा , प्रभु हर ॐ शिव ओंकारा|
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्द्धांङ्गी धारा ॥
|| ॐ जय शिव ओंकारा……||
एकानन, चतुरानन, पंचानन राजै |
हंसानन , गरुड़ासन, वृषवाहन साजै॥
|| ॐ जय शिव ओंकारा……||
दो भुज चार चतुर्भज दस भुज अति सोहै |
तीनों रुप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥
|| ॐ जय शिव ओंकारा……||
अक्षमाला, वनमाला ,मुण्डमाला धारी |
चंदन, मृगमद चंदा सोहै, त्रिपुरारी ॥
|| ॐ जय शिव ओंकारा……||
श्वेताम्बर, पीताम्बर, बाघाम्बर अंगे।
सनकादिक, ब्रह्मादिक, भूतादिक संगे॥
|| ॐ जय शिव ओंकारा……||
कर मध्ये कमण्डलु, चक्र त्रिशूलधारी |
सुखकारी दुखहारी जगपालनकारी ॥
|| ॐ जय शिव ओंकारा……||
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका |
प्रवणाक्षर में शोभित ये तीनों एका ॥
|| ॐ जय शिव ओंकारा……||
त्रिगुण शिव जी की आरती जो कोई नर गावे |
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥
|| ॐ जय शिव ओंकारा……||
॥ इति श्री शिव जी की आरती॥

||| ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय |||

Somvar Vrat Aarti

English 

Om Jai Shiv Omkara, prabhu har Shiv Omkara।
Brahma, Vishnu, Sadashiv, Ardhangi Dhara॥
॥ Om Jai Shiv Omkara..॥
Ekanan Chaturanan Panchanan Raje।
Hansanan, Garudasan Vrishvahan Saje॥
॥ Om Jai Shiv Omkara..॥
Do Bhuj, Chaar Chaturbhuj Dashabhuj Ati Sohe।
Teeno Roop Nirakhataa Tribhuvan Jan Mohe॥
॥ Om Jai Shiv Omkara..॥
Akshmaala Vanmala Mundmala Dhari।
Chandan MrigMad Sohe, Bhale Shashi Dhari॥
॥ Om Jai Shiv Omkara..॥
Shvetambar Pitambar Baaghambar Ange।
Sankadik Brahmadik Bhootadik Sange॥
॥ Om Jai Shiv Omkara..॥
Kar Madhya Kamandalu Chakra Trishuldharta।
Jagharta Jagkarta Jagpalan Karta॥
॥ Om Jai Shiv Omkara..॥
Brahma Vishnu Sadashiv Janat Aviveka।
Pranavakshar Ke Madhye ,Yah Teeno Ekaa॥
॥ Om Jai Shiv Omkara..॥
Trigunswami Ji Ki Aarti Jo Koi Nar Gaave।
Kahat Shivanand Swami, Manvanchhit Phal Paave॥
॥ Om Jai Shiv Omkara..॥

||| ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय |||

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About Dr. Deepak Sharma
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